इस शिवलिंग के खंडित होने की भी एक कहानी है। इस शिवलिंग को खंडित करने का दुस्साहस एक ब्रिटिश इंजीनियर ने किया था जिसके परिणाम स्वरुप उसका मौत हो गई। लोगों के अनुसार ब्रिटिश शासन के समय जब रेलवे लाइन बिछाने का काम चल रहा था, और गोइलकेरा के बड़ैला गांव के नजदीक खुदाई हो रही थी। उसी दौरान खुदाई में एक शिवलिंग निकला जिसको देखकर मजदूरों ने खुदाई रोक दी।

इस काम को कराने वाले वहां मौजूद ब्रिटिश इंजीनियर रॉबर्ट हेनरी ने कहा कि ये सब अंधविश्वास है और उसने फावड़े से शिवलिंग पर मार दिया जिससे शिवलिंग खंडित हो गया। लेकिन आश्चर्य कि बात है कि शाम को घर लौटते समय रास्ते में ही उस ब्रिटिश इंजीनियर रॉबर्ट हेनरी इंजीनियर की मौत हो गई। इसके बाद शिवलिंग के छोटे हिस्से को रतनबुरू पहाड़ी पर ग्राम देवी के बगल में स्थापित किया गया। खुदाई में जहां शिवलिंग प्रकट हुआ था, वहां आज महादेवशाल मंदिर है।

कहते हैं कि शिवलिंग के प्रकट होने के बाद मजदूरों ग्रामीणों ने वहां रेलवे लाइन के लिए खुदाई कार्य का जोरदार विरोध किया। अंग्रेज अधिकारियों के साथ आस्थावान लोगों की कई बार बैठकें भी हुई। ब्रिटिश इंजीनियर रॉबर्ट हेनरी की मौत की गूंज ईस्ट इंडिया कंपनी के मुख्यालय कोलकाता तक पहुंची। आखिरकार ब्रिटिश हुकूमत ने रेलवे लाइन के लिए शिवलिंग से दूर खुदाई कराने का फैसला किया। इसकी वजह से चलते इसकी दिशा बदली गई और दो बड़ी सुरंगों का निर्माण कराना पड़ा।

ब्रिटिश इंजीनियर की रास्ते में हुई मौत के बाद उसके शव को गोइलकेरा लाया गया। यहां पश्चिमी रेलवे केबिन के पास स्थित साइडिंग में शव को दफनाया गया। इंजीनियर की कब्र यहां आज भी मौजूद है, जो डेढ़ सौ साल से ज्यादा पुरानी उस घटना की याद दिलाती है।

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